शिव कृपा प्राप्ति का सबसे शीघ्र फलदायी व्रत। यह व्रत शिव की कृपा प्राप्ति का सर्वोत्तम साधन है और हिंदू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
शिव कृपा प्राप्ति का सबसे शीघ्र फलदायी व्रत। शास्त्रों के अनुसार शिव इस दिन भक्तों की पुकार सुनते हैं और उनकी मनोकामनाएं पूरी करते हैं। पुराणों में वर्णन है कि नियमित रूप से इस व्रत का पालन करने से व्यक्ति को अनेक जन्मों के पापों से मुक्ति मिलती है और मोक्ष प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। प्रदोष व्रत सिर्फ उपवास नहीं है — यह आत्म-शुद्धि, मानसिक नियंत्रण, और देव-संपर्क का गहन साधन है।
सेवन योग्य पदार्थ: फल, दूध। ये पदार्थ Ayurveda में 'सात्विक' और 'फलाहारी' माने जाते हैं — ये शरीर में लघुता (हल्कापन) बनाए रखते हैं और ध्यान-साधना में बाधा नहीं डालते।
पूर्णतया वर्जित: अनाज, नमक। ये पदार्थ 'राजसिक' या 'तामसिक' प्रकृति के हैं और व्रत की पवित्रता को भंग करते हैं। प्याज-लहसुन विशेष रूप से इसलिए वर्जित हैं क्योंकि ये वासना और चंचलता बढ़ाते हैं — जो व्रत के सात्विक उद्देश्य के विपरीत है।
उपरोक्त मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें। रुद्राक्ष की माला उपयोग करें। सुनकर सीखने के लिए हमारी मंत्र लाइब्रेरी देखें।
प्रदोष व्रत की मुख्य कथा भगवान शिव से संबंधित है। पुराणों के अनुसार, एक भक्त ने अत्यंत श्रद्धा से इस व्रत का पालन किया और शिव ने प्रसन्न होकर उन्हें मनवांछित फल प्रदान किया। कथा सुनने मात्र से ही पुण्य फल प्राप्त होता है — इसलिए परिवार के सभी सदस्यों को कथा अवश्य सुनाएं।
व्रत खोलने के बाद हल्का सात्विक भोजन करें। ब्राह्मण या गरीब को भोजन कराएं। दक्षिणा और दान दें। पूरे दिन शिव का स्मरण रखें। संभव हो तो उस दिन सत्संग या भजन में भाग लें।
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