Skip to main content
Next Festival in 11 days
దేవశయని ఏకాదశి
Devshayani Ekadashi (Chaturmasya begins) · Thu, 25 Jun 2026
11
days to go
Also coming:
జగన్నాథ రథ యాత్ర
in 12 days
గురు పూర్ణిమ
in 25 days
See all festivals →

दैनिक पंचांग

पंचांग भारतीय वैदिक ज्योतिष का सबसे प्राचीन और प्रामाणिक कालगणना ग्रंथ है। यह हिंदू धर्म का एक अत्यंत महत्वपूर्ण अंग है जो हमें प्रत्येक दिन की शुभ-अशुभ घड़ियों, तिथि, नक्षत्र, योग, करण और वार की जानकारी प्रदान करता है। नित्य पंचांग के माध्यम से आप अपने दैनिक जीवन के सभी महत्वपूर्ण कार्यों के लिए शुभ मुहूर्त का चयन कर सकते हैं।

प्राचीन काल से ही ऋषि-मुनि और विद्वान पंचांग के आधार पर विवाह, गृह प्रवेश, यज्ञ, व्रत, उपवास, यात्रा, व्यापार आरंभ तथा अन्य धार्मिक एवं सांसारिक कार्यों का निर्धारण करते आए हैं। आज भी करोड़ों भारतीय परिवार अपने दैनिक धार्मिक अनुष्ठानों और पूजा-पाठ के लिए पंचांग पर निर्भर रहते हैं।

नित्य पंचांग वेबसाइट आपको सटीक खगोलीय गणनाओं के आधार पर प्रतिदिन का अद्यतन पंचांग प्रदान करती है, जिसमें सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय, राहु काल, यमगंड, गुलिक काल, अभिजित मुहूर्त सहित सभी महत्वपूर्ण जानकारियां सम्मिलित हैं।

पंचांग क्या है?

पंचांग संस्कृत के दो शब्दों "पंच" (पांच) और "अंग" (भाग) से मिलकर बना है, जिसका अर्थ है "पांच अंगों वाला"। ये पांच अंग हैं - तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण। इन पांचों तत्वों के सम्मिलित अध्ययन से ही किसी दिन का पूर्ण ज्योतिषीय स्वरूप ज्ञात होता है। पंचांग केवल एक कैलेंडर नहीं है, अपितु यह एक संपूर्ण खगोलीय एवं ज्योतिषीय गणना प्रणाली है जो सूर्य और चंद्रमा की गति पर आधारित है। हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य को आरंभ करने से पहले पंचांग देखना अनिवार्य माना जाता है।

तिथि (चंद्र दिवस)

तिथि चंद्रमा की कलाओं पर आधारित होती है। एक चंद्र मास में कुल 30 तिथियां होती हैं - 15 शुक्ल पक्ष की और 15 कृष्ण पक्ष की। प्रतिपदा, द्वितीया, तृतीया, चतुर्थी, पंचमी, षष्ठी, सप्तमी, अष्टमी, नवमी, दशमी, एकादशी, द्वादशी, त्रयोदशी, चतुर्दशी, और पूर्णिमा/अमावस्या - ये तिथियां प्रत्येक धार्मिक कृत्य के लिए महत्वपूर्ण हैं। एकादशी का व्रत, पूर्णिमा की पूजा, अमावस्या को पितृ तर्पण - सभी तिथियों के अनुसार ही किए जाते हैं।

नक्षत्र (27 चंद्र भवन)

आकाश को 27 बराबर भागों में विभाजित किया गया है, जिन्हें नक्षत्र कहा जाता है। अश्विनी, भरणी, कृत्तिका, रोहिणी, मृगशिरा, आर्द्रा, पुनर्वसु, पुष्य, आश्लेषा, मघा, पूर्वा फाल्गुनी, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, चित्रा, स्वाति, विशाखा, अनुराधा, ज्येष्ठा, मूल, पूर्वाषाढ़ा, उत्तराषाढ़ा, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद, उत्तरा भाद्रपद और रेवती - ये 27 नक्षत्र हैं। प्रत्येक व्यक्ति का जन्म नक्षत्र उसके जीवन, स्वभाव और भविष्य को प्रभावित करता है।

योग (27 योग)

योग सूर्य और चंद्रमा के विशिष्ट कोणीय संबंध से बनते हैं। कुल 27 योग होते हैं - विष्कुम्भ, प्रीति, आयुष्मान, सौभाग्य, शोभन, अतिगण्ड, सुकर्मा, धृति, शूल, गण्ड, वृद्धि, ध्रुव, व्याघात, हर्षण, वज्र, सिद्धि, व्यतीपात, वरीयान, परिघ, शिव, सिद्ध, साध्य, शुभ, शुक्ल, ब्रह्म, ऐन्द्र और वैधृति। इनमें से कुछ योग शुभ माने जाते हैं और कुछ अशुभ। शुभ योगों में किए गए कार्य सफल होते हैं।

करण (11 करण)

करण तिथि का आधा भाग होता है। एक तिथि में दो करण होते हैं। कुल 11 करण होते हैं जिनमें 7 चर करण - बव, बालव, कौलव, तैतिल, गर, वणिज, विष्टि (भद्रा) और 4 स्थिर करण - शकुनि, चतुष्पाद, नाग, किंस्तुघ्न शामिल हैं। विष्टि या भद्रा करण को अशुभ माना जाता है और इस समय कोई भी शुभ कार्य आरंभ नहीं किया जाता।

राहु काल, यमगंड और गुलिक काल - अशुभ समय

दिन के कुछ निश्चित समय अशुभ माने जाते हैं जिनमें कोई भी शुभ कार्य आरंभ नहीं करना चाहिए। राहु काल प्रतिदिन लगभग डेढ़ घंटे का होता है और प्रत्येक वार के अनुसार अलग-अलग समय पर आता है। यमगंड भी एक अशुभ काल है जो यम के स्वामित्व में आता है। गुलिक काल को शनि का पुत्र माना जाता है और यह भी अशुभ कार्यों के लिए अनुकूल नहीं है। इन तीनों कालों में यात्रा, नया व्यापार, विवाह वार्ता आदि से बचना चाहिए।

दैनिक जीवन में पंचांग का उपयोग

पंचांग का उपयोग केवल धार्मिक कार्यों तक सीमित नहीं है। आधुनिक जीवन में भी इसका महत्व है - नया व्यवसाय आरंभ करना, गृह प्रवेश, वाहन खरीद, संपत्ति क्रय-विक्रय, विवाह तय करना, बच्चे का नामकरण, मुंडन संस्कार, उपनयन, यात्रा, परीक्षा, साक्षात्कार आदि सभी कार्यों के लिए शुभ मुहूर्त देखकर ही प्रारंभ करना चाहिए। अभिजित मुहूर्त दिन का सबसे शुभ समय माना जाता है।

क्षेत्रीय त्योहार कैलेंडर

भारत के विभिन्न क्षेत्रों में मनाए जाने वाले प्रमुख हिंदू त्योहार पंचांग के अनुसार ही निर्धारित होते हैं - दीपावली, होली, रक्षाबंधन, जन्माष्टमी, राम नवमी, नवरात्रि, दशहरा, गणेश चतुर्थी, महाशिवरात्रि, करवा चौथ, छठ पूजा, मकर संक्रांति, बैसाखी, पोंगल, उगादी, गुड़ी पड़वा, ओणम आदि। प्रत्येक त्योहार की तिथि और मुहूर्त पंचांग में स्पष्ट रूप से दिए जाते हैं।

शहर-विशिष्ट पंचांग पृष्ठ

आपके शहर के अक्षांश-देशांतर के अनुसार पंचांग की गणना भिन्न होती है क्योंकि सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्रोदय का समय हर स्थान पर अलग होता है। नीचे दिए गए लिंक से अपने शहर का सटीक पंचांग देखें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्र: पंचांग के पांच अंग कौन से हैं?

उ: तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण - ये पांच अंग हैं जिनसे पंचांग का निर्माण होता है।

प्र: राहु काल में क्या नहीं करना चाहिए?

उ: राहु काल में कोई भी नया शुभ कार्य, यात्रा, व्यापार आरंभ, विवाह संबंधी निर्णय आदि नहीं करना चाहिए।

प्र: अभिजित मुहूर्त क्या है?

उ: अभिजित मुहूर्त दिन का सबसे शुभ समय है जो दोपहर के लगभग 48 मिनट का होता है। इस समय किया गया कार्य सफल होता है।

प्र: क्या प्रत्येक शहर का पंचांग अलग होता है?

उ: हां, सूर्योदय और सूर्यास्त के समय में अंतर के कारण हर शहर का पंचांग थोड़ा भिन्न होता है।

प्र: एकादशी का क्या महत्व है?

उ: एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित तिथि है। इस दिन व्रत रखने से समस्त पापों का नाश और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

आज का सटीक पंचांग देखने के लिए अपने शहर का चयन करें और शुभ मुहूर्त के अनुसार अपने दिन की योजना बनाएं।

తెలుగు పంచాంగం 2026 — Quick Links to Calendar, Mantras, Pilgrimage & Spiritual Content

2026-27 Calendar

Vrat & Date Lists

Mantras & Stotras

Pilgrimage & Temples

Doshas & Astrology

Daily & Other

Library & Tools