तिथि का आधा — वैदिक ज्योतिष और पंचांग में करण का गहन महत्व है।
एक तिथि के दो करण होते हैं। कुल 11 करण हैं — 7 चर (घूमते रहते हैं) और 4 स्थिर। विष्टि (भद्रा) सबसे अशुभ करण है।
एक तिथि के दो आधे भाग दो करण बनाते हैं। 11 करणों में से 7 चर (हर बार बदलते हैं) और 4 स्थिर (सिर्फ कृष्ण चतुर्दशी और अमावस्या में आते हैं) हैं। विष्टि करण (भद्रा) सबसे अशुभ माना जाता है।
करण पंचांग के पंच अंगों में से एक है (या उससे संबंधित अवधारणा है), जिसका दैनिक जीवन में बहुत महत्व है। शुभ कार्य, व्रत, मुहूर्त, और अनुष्ठानों के निर्णय में करण की गणना का प्रयोग होता है।
करण का उपयोग निम्न में होता है:
करण को समझने के लिए इन संबंधित विषयों का अध्ययन भी आवश्यक है: तिथि, नक्षत्र, योग, करण, वार, मुहूर्त, राहु काल, अभिजित मुहूर्त, ग्रह, राशि।
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