शनि का 7.5 वर्ष — वैदिक ज्योतिष और पंचांग में साढ़े साती का गहन महत्व है।
शनि का जन्म-राशि के 12वें, 1वें, और 2वें भाव से होकर 7.5 साल का गोचर। तीन ढाई-ढाई वर्ष के चरण — आरोही, चरम, अवरोही।
शनि का गोचर जन्म-राशि के 12वें भाव से शुरू होकर, 1वें (जन्म-राशि), और 2वें भाव से होते हुए कुल 7.5 वर्ष की अवधि बनाता है। हर भाव में लगभग 2.5 साल।
साढ़े साती पंचांग के पंच अंगों में से एक है (या उससे संबंधित अवधारणा है), जिसका दैनिक जीवन में बहुत महत्व है। शुभ कार्य, व्रत, मुहूर्त, और अनुष्ठानों के निर्णय में साढ़े साती की गणना का प्रयोग होता है।
साढ़े साती का उपयोग निम्न में होता है:
साढ़े साती को समझने के लिए इन संबंधित विषयों का अध्ययन भी आवश्यक है: तिथि, नक्षत्र, योग, करण, वार, मुहूर्त, राहु काल, अभिजित मुहूर्त, ग्रह, राशि।
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