मांगलिक स्थिति — वैदिक ज्योतिष और पंचांग में मंगल दोष का गहन महत्व है।
जब मंगल जन्म कुंडली के 1वें, 2वें, 4वें, 7वें, 8वें, या 12वें भाव में हो — मंगल दोष कहलाता है। विवाह में देरी या मतभेद का कारण माना जाता है।
जन्म कुंडली में मंगल का 1, 2, 4, 7, 8, या 12वें भाव में स्थित होना मंगल दोष कहलाता है। यह विवाह में देरी, मतभेद, या जीवनसाथी की हानि का कारक माना जाता है। कुछ अपवाद और रद्दीकरण नियम भी हैं।
मंगल दोष पंचांग के पंच अंगों में से एक है (या उससे संबंधित अवधारणा है), जिसका दैनिक जीवन में बहुत महत्व है। शुभ कार्य, व्रत, मुहूर्त, और अनुष्ठानों के निर्णय में मंगल दोष की गणना का प्रयोग होता है।
मंगल दोष का उपयोग निम्न में होता है:
मंगल दोष को समझने के लिए इन संबंधित विषयों का अध्ययन भी आवश्यक है: तिथि, नक्षत्र, योग, करण, वार, मुहूर्त, राहु काल, अभिजित मुहूर्त, ग्रह, राशि।
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